श्री दत्तात्रेय चालीसा
दत्तगुरु के चरणों में,
मेरा कोटि प्रणाम ।
रक्षा करो हे दत्त प्रभु,
रख लो अपनी शरण ।।
रक्षा करो हे दत्त प्रभु,
रख लो अपनी शरण ।।
जयति जयति दत्तात्रेय,
स्वामी दिगम्बर जय ।
आदि ब्रह्मा, मध्यम विष्णु,
देवा महेश्वर जय ।।
जयति जयति त्रिमूर्ति रूप,
भव बाधा हरते जय ।
सहज प्राप्ति हर हर जय,
शुभ फल सुख देते जय ।।
जयति जयति अनसूया नन्दन,
परम गम्भीर प्रभु जय ।
हर कृपा कर सरसिज पद,
भक्तों को सुख देते जय ।।
श्रीगणेश, श्रीशारदा,
लक्ष्मी सहित शिव जय ।
सतगुरु चरन, कमल सेवा,
भव निधि से त्राण कर जय ।।
सिर झुकाये, हाथ जोड़े,
करें भक्ति प्राण जय ।
त्रिभुवन में, प्रकट प्रभु दत्त,
ब्रह्मानन्द स्वरूप जय ।।
गुरु गम्भीर, कृपा सागर,
कर जोड़ों चरणारविन्द ।
शरणागत, रक्षण कर्ता,
रखों हमारी लाज प्रभु ।।
श्रीदत्तात्रेय प्रभु, कृपाकर,
सदा सहाय रहो प्रभु ।
भक्तिवान, दुःख से त्राण,
सदा सबन का करें कल्याण प्रभु ।।
कर भरोसा, मन में आस,
स्वामी सुखदाता जय ।
मति हमारी शुद्ध कर प्रभु,
दोष, दुष्कृत मिटा प्रभु ।
ध्यान लगायें, चित्त मनायें,
श्रीदत्त कृपा से प्रभु ।
भक्त गण, करें सुमिरन,
सदा सहाय हो प्रभु ।।
जयति जयति दत्तगुरु,
ब्रह्मानन्द दाता जय ।
अघनाशक, त्रिविक्रम देव,
ज्ञान भक्ति दो प्रभु ।
सुमिरन से भव-बन्धन, से
सदा मुक्त रहें प्रभु ।
त्रिविध ताप, मिट जायें प्रभु,
अन्त करण सुधीर हो प्रभु ।।
श्रीदत्त शरणं, मोक्ष सुलभ,
भव सागर से त्राण हो ।
भव-भय हारक, सतगुरु,
कष्ट निवारक हो प्रभु ।
शरणागत, मोक्ष प्रदायक,
सुलभ सरल करते प्रभु ।
करुणामय, सन्तत हर्षायें,
भव से मुक्ति हो प्रभु ।।
श्रीदत्तात्रेय शरणं,
भव बाधा हरण प्रभु ।
श्रीदत्तात्रेय शरणं,
पाप-ताप-त्रय हरण प्रभु ।
श्रीदत्तात्रेय शरणं,
मन में आस लगायें प्रभु ।
भक्तजन, करें स्मरण,
सदा सहाय हो प्रभु ।।
जयति जयति दत्तगुरु,
सर्व रोग हरते प्रभु ।
जयति जयति दत्तगुरु,
पाप-ताप निवारक प्रभु ।
जयति जयति दत्तगुरु,
करुणा कृपा निधान प्रभु ।
जयति जयति दत्तगुरु,
जगत तारन प्रभु ।।
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