श्री खंडोबा चालीसा
।। दोहा ।।
मार्तण्ड भैरव खंडोबा, जेजुरी के राज।
चालीसा गाऊँ तुम्हरी, करो भक्त का काज।।
म्हाळसा और बाणाई, दो पट्टरानी संग।
खंडोबा की महिमा गाऊँ, रंगी भक्ति के रंग।।
।। चौपाई ।।
जय खंडोबा जेजुरी नाथ।
भक्तों के हो तुम साथ।।
मार्तण्ड भैरव तुम कहाते।
शिव के अवतार कहलाते।।
जेजुरी पर्वत पर विराजे।
सोने का मंदिर में साजे।।
पुणे जिले में धाम।
महाराष्ट्र का यश धाम।।
हल्दी के भोग लगाते।
भक्त हल्दी चढ़ाते।।
पीले वस्त्र में सजे हो।
भैरव रूप में लगे हो।।
श्वेत अश्व पर सवार।
करते भक्तों का उद्धार।।
म्हाळसा संग बिराजे।
बाणाई भी साथ साजे।।
चंपा षष्ठी को पूजे।
सोमवती अमावस को जूझे।।
महाराष्ट्र के ग्रामदेव।
सब पर करते हो मेव।।
मणि-माळू असुर मारे।
भक्त जन थे जो बेचारे।।
रक्षा की थी उन सब की।
महिमा अपरम्पार सब की।।
धनगर और कुनबी पूजे।
माली और कासार जूझे।।
कोली और ब्राह्मण।
सब मिल करें दर्शन।।
खंडोबा की महिमा गाऊँ।
चालीसा पाठ नित करूँ।।
सब मनोकामना पूरी हो।
जीवन में खुशहाली हो।।
जय जय खंडोबा महाराज।
पूरो भक्तों के सब काज।।
हल्दी में रंगे तुम्हारे।
भक्त हैं प्रिय तुम्हारे।।
।। दोहा ।।
खंडोबा चालीसा का पाठ, करे जो नित नेम।
जेजुरी के राज की कृपा, मिले परम आनंद क्षेम।।
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