श्री सालासर बालाजी चालीसा
॥ दोहा ॥
गुरु गिरा अरु गणपति, पुनि विनवऊॅ हनुमान |
सालासर के देवता, सदा करो कल्याण || (१)
लाल देह की लालिमा, मूर्ति लाल ललाम |
हाथ जोड़ विनती करूं, पुरण करो सबके काम || (२)
॥ चौपाई ॥
जय जय जय सालासर धामा |
पावन रुचिर लोक अभीरामा || (१)
जिमि पावन मथुरा अरू काशी |
पुष्कर कुरुक्षेत्रं सुखरासी || (२)
अवधपुरि, गंगे हरिद्वारा |
सालासर शुभ वरणु विचारा || (३)
राजस्थान सीकर निहराये |
लक्ष्मणगढ़ नगर मन भाये || (४)
तेहि नियम सालासर ग्रामा |
सर्कल भान्ति शुभ शुचि सुकधामा || (५)
सिद्ध पीठ यह परम पुनिता |
हनुमत दर्शन सब दु:ख बीता || (६)
ताते विनय करो सुनु बाई |
भजहुं पवनसुत सुमति पाई || (७)
सालासर हनुमत जिमि आवा |
कहुं सकल सुनु मन समुझावा || (८)
मोहनदास विप्र सब जाना |
भक्ति भाव गुण ज्ञान निधाना || (९)
उदय संगं ले खेत कमाये |
एक बार हनुमत तहं आये || (१०)
कह कपि विप्र सुनो मम बानी |
कीजे ध्यान भक्ति जिय जानी || (११)
तब तजि मोहन विप्र विचारी |
हनुमत जन सदा सुखकारी || (१२)
करई भजन भक्ति अरू ध्याना |
नित्य होई मिलन हनुमाना || (१३)
आसोटा मुरति प्रगटाये |
ले ठाकुर सालासर आये || (१४)
विक्रम अष्टादश शत ग्यारह |
आयऊ हनुमत रवि जिमि बारह || (१५)
श्रावण सित नवमी शनीवारा |
थायन योग भूमि असवारा || (१६)
मोहन पूजन हवन करवाई |
कपि मूरति थापी सुखदाई || (१७)
आरती मोहन मंगल गावा |
ढोल नगारा शब्द मुहावा || (१८)
चढे़ चूरमा भोग लगाये |
भजन कीर्तन सब मिलकर गाये || (१९)
एक बार मोहन मन भाई |
भई प्रेरणा मुर्त सजाई || (२०)
चित्र रचा जो मन सुखदाई |
भये प्रसन्न हनुमत कपिराई || (२१)
घृत सिंदूर थाल भर लीना |
मुरत लाल ललित कर दीना || (२२)
मोहन बोले उदय बुलाई |
हनुमत कहं अवराधै आई || (२३)
सेवहुं हनुमत लग्न लगाई |
नित प्रति भगती बढै सवाई || (२४)
सालासर जयकार मुहाई |
चहुंदिशी घंटा धुनि मन भाई || (२५)
दिन दिन हो मंदिर विस्तारा |
पूजा करे उदय परिवारा || (२६)
मंगल पूनम जो मन भाये |
सालासर शुभ दर्शन पाये || (२७)
ध्वजा नारियल आत चढ़ाये |
खांड चूरमा भोग लगाये || (२८)
हनुमत भजन करइ मन लाई |
सालासर हनुमान मनाई || (२९)
एहिविधि आई धोक लगाये |
मन इच्छा फल सब जन पाये || (३०)
आत्म ज्ञान बढे़ नित नाया |
जब ते होय हनुमत दाया || (३१)
सब विघ्न कष्ट विकार हटावे |
सालासर शरणा जो जावे || (३२)
चिंता सांपिनी ताको भाजे |
जाके हिय में हनुमत राजे || (३३)
हनुमत दर्शन अति मन भाई |
लाल देह छवि कहि नहिं जाई || (३४)
दूर-दूर से आवे लोग लुगाई |
बड़े भाग ते दर्शन पाई || (३५)
करहि सफल सब निज निज लोचन |
करि करि दर्शन संकट मोचन || (३६)
हनुमत महिमा चहुंदिशि गाजे |
सालासर हनुमान विराजे || (३७)
सालासर शुभ धाम भजामी |
जय जय जय बजरंग नमामि || (३८)
इंद्रजीत कपिराई सहाई |
सालासर महिमा जो गाई || (३९)
सालासर हनुमत चालीसा |
पढें सुने शुभ करे कपीसा || (४०)
दोहा
चालीसा शुभ धाम का, गाये जो चितलाय |
इंद्रजीत भगति बढें, दया करे कपिराय ||
ओम सुमर गाते रहो, नित श्री सीताराम |
सालासर शरणा गहो, करि हनुमत प्रणाम ||
॥ श्री सालासर हनुमान जी का चालीसा सम्पूर्ण ॥
॥ जय–घोष ॥
बोलो सालासर बालाजी की जय
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